अच्छे खासे मूड को ख़राब कर देंगी ये तस्वीरें

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कपिंग थेरेपी अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं तो आपने कुछ मशहूर हस्तियों की ऐसी तस्वीरें जरूर देखी होंगी जिनमें उनके शरीर पर गोलाकार लाल धब्बे दिखाई देते हैं ऐसा कपिंग थेरेपी की वजह से होता है कपिंग थेरेपी चीन और मिस्र की एक प्राचीन थेरेपी है

इसमें शरीर में एक सिलिकॉन बांस या तो फिर शीशे के बने कप को आग लगाते हैं और जब ठंडा हो जाए तो इसे आप की स्किन पर रखते हैं उससे बॉडी और कप के बीच में वैक्यूम क्रिएट होता है और वहां पर एक लाल दबाव बन जाता है लेकिन हो सकता है

कपिंग थेरेपी करने वाला आपके स्किन में सूई चुभोकर कुछ छोटे छेद कर सकता है जिससे शरीर के खून बाहर आते हैं इसे करने से स्पाइनल डिस्क अर्थराइटिस जैसी बीमारी सही होती है और जो लोग इसका रेगुलर सेशन लेते हैं उनका कहना है कि इससे खून शुद्ध होता है और शरीर में चमक आती है

बी स्टिंग थैरिपी – अक्सर लोग मधुमक्खी को देखकर डर जाते हैं और उससे दूर होते हैं क्योंकि मधुमक्खी का डंक एक बार आपको लग जाए तो बहुत ज्यादा दर्द का कारण बनता है लेकिन बी स्टिंग थेरेपी में प्रोफेशनल मधुमक्खियों से जी हां प्रोफेशनल से आपको कटवाया जाता है

जिससे उनका ढंग आपके शरीर के अंदर चला जाता है माना जाता है कि इस थेरेपी से शरीर में सूजन आती है और शरीर को एक सिग्नल मिलता है कि वह अपने इम्यून सिस्टम को ज्यादा मजबूत कर सके इससे कई तरीके की बीमारी जैसे घुटने का दर्द पैरों की सूजन आदि को ठीक किया जाता है लेकिन इसी के साथ इसके कई सारे साइड इफेक्ट भी निकल के सामने आते हैं जो कि जानलेवा भी हो सकते हैं इसलिए इस विधि का प्रचलन बहुत ज्यादा नहीं है

एक सिद्धांत का कहना यह भी है कि यह उपचार यानी कि मधुमक्खी से कटवाना शरीर के उस हिस्से में किया जाता है जहां पर कोई दिक्कत हो मान लीजिए आपको घुटने में दिक्कत है तो मधुमक्खी से आपके घुटने को कटवाया जाएगा यानी कि करवाया जाएगा जैसे शरीर को सिग्नल मिलेगा किस हिस्से में इम्यून सिस्टम की जरूरत ज्यादा है और मधुमक्खी के ठीक करने के साथ-साथ उस समस्या से भी निजात मिल जाएगा आपको बता दें कि यह लगभग 5 साल पुरानी है

ट्रेन की पटरी से उपचार-  सुनने में अजीब लगे लेकिन यह बिल्कुल सच है आपको इंडोनेशिया में कई जगहों पर ट्रेन की पटरी पर लेटे हुए आदमी देखने को मिल जाएंगे उनका मानना है कि ऐसा करने से उनकी लाइलाज बीमारी ठीक हो जाएगी

इसके पीछे का लॉजिक यह दिया जाता है कि जब रेलवे ट्रैक के पास से ट्रेन गुजरती है तो रेलवे ट्रैक में विद्युत ऊर्जा का संचार होता है और जब उनका शरीर और पटरी दोनों संपर्क में आते तो उनके शरीर में भी विद्युत ऊर्जा का संचार होता है जिससे उनकी लाइलाज बीमारी ठीक हो जाती है अब इस चीज में सच्चाई कितनी है इसकी पुष्टि तो हम नहीं करते लेकिन कहा जाता है कि एक बार एक बुजुर्ग अपनी लाइलाज बीमारी से काफी परेशान था जान देने का फैसला किया और जाकर कट गया आ रही थी उसने देखा था और ऐसा करते करते उसकी लाइलाज बीमारी ठीक हो गई और वह पटरी से उठ कर चला गया ये विधि इंडोनेशिया में काफी प्रचलित है

इयर कैंडल्स थेरेपी- सुनने पर ही आपको समझ में आ रहा होगा कि यह थैरेपी विशेष तौर पर कान के इलाज के लिए बनाई गई है इसमें एक विशेष प्रकार का मुंह लगा हुआ फैब्रिक इस्तेमाल किया जाता है जिसे कैंडल बोलते हैं और इसे जला कर के कान में रख दिया जाता है

तकरीबन 4 से 5 मिनट तक इस कैंडल को जलने देते हैं और इससे ईयर बैक और कान की अन्य समस्याओं से निजात मिलता है कुछ लोगों का मानना है कि इससे सुनने की क्षमता में वृद्धि होती है वहीं कुछ लोगों का मानना है कि वजह से परमानेंट हो सकता है

मैंगॉड थेरेपी – इस विधि में एक विशेष प्रकार के कीड़ों का इस्तेमाल किया जाता है जिसे मैंगोट कहते हैं मैंगोट वो कीड़े होते है जब भी कोई जीव मरता है तो ये उसके शरीर में पनप करके उसके शरीर को तुरंत खाने लगते हैं जैसे कभी चूहा मर जाए तो कीड़े पड़ जाते हैं

असल में वह कीड़े मैंगोट होते हैं इस विधि में जब शरीर में कोई घाव लगता है या शरीर में सड़न पैदा होती है तू कुछ हिस्सों पर इन कीड़ों को छोड़ दिया जाता है जिससे कीड़े धीरे-धीरे उस हिस्से को खा करके खत्म कर देते हैं और वहां पर नई कोशिकाएं बनने लगती हैं जिससे शरीर का सड़ा हुआ भाग ठीक हो जाता है

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