जरुर जानिये, कलियुग के वो कड़वे सत्य जिसे भगवन ने श्री कृष्ण ने पहले ही बता दिया था,

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महाभारत होने के पश्चात युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से एक प्रश्न पूछा था जिसका बहुत ही अच्छा वर्णन भागवत गीता में किया गया है युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि हे प्रभु द्वापर युग जाने वाला है और कलयुग आने वाला है तो क्या आप हमें बता सकते हैं कि यह जो आने वाला युग है ये कि किस प्रकार का होगा?

इसके बाद उनका उत्तर देते हुए भगवान श्री कृष्ण ने कहा सबसे पहले तो पांचों भाई वन की तरफ से आओ और तुम्हें जो भी सबसे अजीब चीज देखे तुम उसके बारे में आकर के मुझे बताओ फिर मैं तुम्हारे सभी प्रश्नों का उत्तर दे दूंगाजिसके बाद भगवान श्री कृष्ण की बात को मानते हुए पांचों भाई वन  की तरफ चले गए लेकिन वन में पहुंचकर उन पांचों ने जो भी चीजें देखी वह काफी आश्चर्यचकित करने वाली थी

शाम को लौट कर के सभी भाई भगवान श्री कृष्ण के पास आए और उन्होंने उस वाक्य का वर्णन किया जिन चीजों को उन्होंने जंगल में देखा था सबसे पहले युधिष्ठिर ने उन्हें बताया
युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से कहा प्रभु जब हम सब जंगल पहुंचे तो वहां पर हम सभी ने अलग-अलग दिखाएं पकड़ ली और अलग-अलग दिशाओं की ओर बढ़ चले लेकिन जैसे ही मैं आगे बढ़ा मुझे एक हाथी दिखा जिसके दो सूंड थे

फिर अर्जुन ने बताया कि प्रभु जैसे मैं आकर बड़ा पहले तो मुझे कुछ नहीं दिखा लेकिन थोड़ी दूर जाते ही मुझे एक अजीब किस्म का पक्षी दिखाई दिया जिसके पर ऊपर वेद की रचनाएं लिखी हुई थी और वह मरे हुए जानवरों का मांस खा रहा था

इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण सहदेव से पूछते हैं कि बताओ सहदेव तुमने क्या देखा सहदेव ने बोला मैंने भी एक बहुत ही आश्चर्य करने वाला वाक्य दिखा जब मैं आगे बढ़ा तो मैंने देखा एक जगह पर कई सारे थे और सारे पानी से भरे हुए थे लेकिन जो भी था वह बिल्कुल सूखा था और उसकी गहराई बाकी सभी को से ज्यादा थी मैं बिल्कुल आश्चर्यचकित रह गया कि यह कैसे संभव है कि भरे हुए हैं लेकिन जो मुख्य है जो बीच में है वह बिल्कुल खाली है जबकि बाकियों से ज्यादा गहरा है

सहदेव की बात को खत्म करते ही नकुल भगवान श्री कृष्ण को बताते हैं कि प्रभु मैंने ही एक ऐसी अजीब घटना देखी मैंने पर्वत पर एक चट्टान को देखा जो लगातार नीचे आ रहा था और नीचे आने के कारण उसके सामने जो भी चीज पढ़ रही थी वह उसे तहस-नहस कर दे रहा था बड़े बड़े वृक्ष उसके नीचे मानो चीटियों की तरह कुछ ले जा रहे थे न जाने कितनी अन्य छोटी छोटी सिलाई उसके नीचे से गुजरती जा रही थी पर वह रुक नहीं रहा था लेकिन जैसे ही वह आगे बढ़ा एक छोटे से पौधे के स्पर्श मात्र से वह तुरंत वहीं पर रुक गया मैं अचंभित रह गया कि बड़े वृक्ष सामने आ गए तो भी यह न रुक सका लेकिन एक छोटे पौधे के स्पर्श से यह कैसे रुक सकता है

इन सभी के उत्तरों को सुनने के बाद भगवान श्री कृष्ण ने बारी-बारी से सभी के प्रश्नों का उत्तर दिया जिसमें छिपा था कि आने वाला यू यानी कि कलयुग कैसा होगा और श्री कृष्ण की कही गई थी यह बातें सत प्रतिशत आज के जमाने में सही साबित होती हैं उन्होंने सबसे पहले युधिष्ठिर को संबोधित करते हुए कहा

युधिष्ठिर को संबोधित करते हुए श्री कृष्ण ने कहा तुमने एक ऐसे हाथी को देखा जिसकी दोष उम्र थी अर्थात कलयुग में ऐसा शासक होगा जो ऊपर से तो कुछ और होगा परंतु अंदर से कुछ और होगा या नहीं ऊपर से तो वह दिखाएगा कि वह प्रजा का चहेता है पर वह इस तरीके का होगा कि वह हर तरीके से प्रजा का शोषण करेगा उसका उद्देश्य प्रजा की भलाई नहीं बल्कि स्वयं की भलाई करना होगा और प्रजा उनके लिए कुछ भी नहीं होंगी

इसके बाद श्री कृष्ण ने अर्जुन को संबोधित करते हुए कहा हे धनंजय तुमने कैसे पक्षी को देखा था जो जिस पर वेद की संरचनाएं थी परंतु वह मरे हुए जीव का मांस खा रहा था अर्थात कलयुग में ऐसे लोग भी होंगे जब ऊपर से तो पढ़े लिखे होंगे और ज्ञानी होंगे परंतु अंदर राक्षस और दैत्य प्रवृत्ति के होंगे
ऐसे लोग इस बात की आस लगाए बैठे हैं कि कैसे सामने वाला मरे और उसकी सारी धन-संपत्ति उसके पास हो

उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने भी हमसे कहा कि अभी तुमने देखा कि कैसे एक गाय अपने बच्चे को इतना ज्यादा चाहती है कि वह लहूलुहान हो जाता है इसका मतलब यह है कि कलयुग की माता है अपने बच्चों को इतना ज्यादा प्रेम और ममता देंगी कि उनके बच्चों का विकास ही नहीं हो पाएगा

वह मां के आंचल तले दबे रहेंगे और उनकी विकास की दर इस युग की अपेक्षा बहुत ज्यादा कम होगी जो कि उनकी मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं इसके अलावा अगर किसी दंपत्ति के बच्चे साधु बनेंगे तो सारा समाज आ करके उनका दर्शन करेगा लेकिन अगर खुद उनके बच्चे साधु बनेंगे तो वह बैठकर रोएंगे कि हमारे बच्चों का क्या होगा हमारे बुढ़ापे का क्या होगा

इसके बाद बारी आती है सहदेव जी प्रभु श्री कृष्ण सहदेव से कहते हैं कि तुमने कैसे कुबं को देखा जो कि खाली था पर उसके अगल-बगल के सारे कोई भरे थे तब इसका अर्थ यह हुआ कि कलयुग में इसी प्रकार के और इसी प्रवृत्ति के मनुष्य होंगे जो कि अपने घर बनाने अपने पुत्र पुत्री के विवाह करने में बहुत ज्यादा धन संचित कर देंगे लेकिन यदि उनके पड़ोसी को धन की जरूरत है या उनके किसी सगे को धन की जरूरत है तो वह उनके ऊपर पैसे नहीं खर्च करेंगे

वह किसी के आंसू पहुंचने से ज्यादा जरूरी अपनी धन और संपदा को अय्याशी और मदिरा में उड़ाना ज्यादा पसंद करेंगे सहदेव मेरे कहने का मतलब यह है कि कलयुग में अन्न के भंडार तो होंगे लेकिन उसके बावजूद लोग भूख से मरेंगे लोग दाने-दाने को तरसेंगे

सहदेव को जब सारी बातें समझ में आ गई तो अंततः भगवान श्री कृष्ण ने नकुल से कहा कि नकुल तुमने कैसे चट्टान को देखी थी जो कि बड़े-बड़े वृक्षों से भी नहीं रुक रहा था परंतु एक छोटे पौधे से रुक गया इसका मतलब यह है कि मनुष्य जीवन इतना पतित हो जाएगा कि बड़े से बड़ा लोग भी उन्हें मिलता जाए तो वह और की इच्छा रखेगा अर्थात ज्यादा से ज्यादा धन और ज्यादा से ज्यादा संपत्ति भी उन्हें संतुष्ट नहीं करेगी

परंतु एक हरि का नाम उन्हें पति से पावन बना देगा उनके मनुष्य जीवन को सफल बना देगा मेरे कहने का तात्पर्य है कि जो व्यक्ति कलयुग में भी भगवान का जब करेगा भगवान को याद करेगा उसे किसी भी तरीके का कोई कष्ट नहीं होगा और वह जिंदगी में संतुष्ट रहेगा और पावन जिंदगी को जिएगा

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